यदि हमारे युवक - युवतियाँ अभिनेताओं तथा अभिनेत्रियों के पहनावा, श्रृंगार, मेकअप, फैशन, पैन्ट, बुश्शर्ट, साड़ियों का अंधानुकरण करते रहे तो असंयमित वासना के द्वार खुले रहेंगे। गंदी फिल्में निरन्तर हमारे युवकों को मानसिक व्यभिचार की ओर खींच रही हैं। उनका मन निरन्तर अभिनेत्रियों के रूप, सौन्दर्य, फैशन और नाज - नजरों में भँवर की तरह अटका रहता है। लाखों - करोड़ों न जाने कितने तरुण - तरुणियों पर इसका जहरीला असर हुआ है फिर भी हम इसे मनोरंजन मानते हैं।
!! हम सुधरेंगे-युग सुधरेगा। हम बदलेंगे-युग बदलेगा !! सावधान! युग बदल रहा है। सावधान। नया युग आ रहा है। इक्कीसवीं सदी- उज्ज्वल भविष्य।
सोमवार, 18 दिसंबर 2017
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