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मंगलवार, 18 मई 2021

👉 एक बात मेरी समझ में कभी नहीं आई

🏳️ध्यान से पढ़ियेगा👇

     〰️〰️〰️〰️〰️

एक बात मेरी समझ में कभी नहीं आई कि 

ये फिल्म अभिनेता (या अभिनेत्री) ऐसा क्या करते हैं कि इनको एक फिल्म के लिए 50 करोड़ '--

या 100 करोड़ रुपये मिलते हैं?

सुशांत सिंह की मृत्यु के बाद यह चर्चा चली थी कि 

जब वह इंजीनियरिंग का टॉपर था तो फिर उसने फिल्म का क्षेत्र क्यों चुना?

जिस देश में शीर्षस्थ वैज्ञानिकों , डाक्टरों , इंजीनियरों , प्राध्यापकों , अधिकारियों इत्यादि को प्रतिवर्ष 10 लाख से 20 लाख रुपये मिलता हो, 

जिस देश के राष्ट्रपति की कमाई प्रतिवर्ष 

1 करोड़ से कम ही हो-

उस देश में एक फिल्म अभिनेता प्रतिवर्ष 

10 करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक कमा लेता है। आखिर ऐसा क्या करता है वह?

देश के विकास में क्या योगदान है इनका? आखिर वह ऐसा क्या करता है कि वह मात्र एक वर्ष में इतना कमा लेता है जितना देश के शीर्षस्थ वैज्ञानिक को शायद 100 वर्ष लग जाएं?

आज जिन तीन क्षेत्रों ने देश की नई पीढ़ी को मोह रखा है, वह है -  सिनेमा , क्रिकेट और राजनीति। 

इन तीनों क्षेत्रों से सम्बन्धित लोगों की कमाई और प्रतिष्ठा सभी सीमाओं के पार है। 

यही तीनों क्षेत्र आधुनिक युवाओं के आदर्श हैं,

जबकि वर्तमान में इनकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगे हैं। स्मरणीय है कि विश्वसनीयता के अभाव में चीजें प्रासंगिक नहीं रहतीं और जब चीजें 

महँगी हों, अविश्वसनीय हों, अप्रासंगिक हों -

तो वह देश और समाज के लिए व्यर्थ ही है,

कई बार तो आत्मघाती भी।

सोंचिए कि यदि सुशांत या ऐसे कोई अन्य 

युवक या युवती आज इन क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं तो क्या यह बिल्कुल अस्वाभाविक है? 

मेरे विचार से तो नहीं। 

कोई भी सामान्य व्यक्ति धन , लोकप्रियता और चकाचौंध से प्रभावित हो ही जाता है ।

बॉलीवुड में ड्रग्स वा वेश्यावृत्ति, 

क्रिकेट में मैच फिक्सिंग, 

राजनीति में गुंडागर्दी  - भ्रष्टाचार 

इन सबके पीछे मुख्य कारक धन ही है 

और यह धन उन तक हम ही पहुँचाते हैं। 

हम ही अपना धन फूँककर अपनी हानि कर रहे हैं। मूर्खता की पराकाष्ठा है यह।

*70-80 वर्ष पहले तक प्रसिद्ध अभिनेताओं को     

 सामान्य वेतन मिला करता था। 

*30-40 वर्ष पहले तक क्रिकेटरों की कमाई भी 

  कोई खास नहीं थी।

*30-40 वर्ष पहले तक राजनीति भी इतनी पंकिल नहीं थी। धीरे-धीरे ये हमें लूटने लगे 

और हम शौक से खुशी-खुशी लुटते रहे। 

हम इन माफियाओं के चंगुल में फँस कर हम

अपने बच्चों का, अपने देश का भविष्य को

बर्बाद करते रहे।

50 वर्ष पहले तक फिल्में इतनी अश्लील और फूहड़ नहीं बनती थीं।  क्रिकेटर और नेता इतने अहंकारी नहीं थे - आज तो ये हमारे भगवान बने बैठे हैं। 

अब आवश्यकता है इनको सिर पर से उठाकर पटक देने की - ताकि इन्हें अपनी हैसियत पता चल सके।

एक बार वियतनाम के राष्ट्रपति 

हो-ची-मिन्ह भारत आए थे। 

भारतीय मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग में उन्होंने पूछा -

" आपलोग क्या करते हैं ?"

इनलोगों ने कहा - " हमलोग राजनीति करते हैं ।"

वे समझ नहीं सके इस उत्तर को। 

उन्होंने दुबारा पूछा-

"मेरा मतलब, आपका पेशा क्या है?"

इनलोगों ने कहा - "राजनीति ही हमारा पेशा है।"

हो-ची मिन्ह तनिक झुंझलाए, बोला - 

"शायद आपलोग मेरा मतलब नहीं समझ रहे। 

राजनीति तो मैं भी करता हूँ ; 

लेकिन पेशे से मैं किसान हूँ , 

खेती करता हूँ। 

खेती से मेरी आजीविका चलती है। 

सुबह-शाम मैं अपने खेतों में काम करता हूँ। 

दिन में राष्ट्रपति के रूप में देश के लिए 

अपना दायित्व निभाता हूँ ।"

भारतीय प्रतिनिधिमंडल निरुत्तर हो गया

कोई जबाब नहीं था उनके पास।

जब हो-ची-मिन्ह ने दुबारा वही वही बातें पूछी तो प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने झेंपते हुए कहा - "राजनीति करना ही हम सबों का पेशा है।"

स्पष्ट है कि भारतीय नेताओं के पास इसका कोई उत्तर ही न था। बाद में एक सर्वेक्षण से पता चला कि भारत में 6 लाख से अधिक लोगों की आजीविका राजनीति से चलती थी। आज यह संख्या करोड़ों में पहुंच चुकी है।

कुछ महीनों पहले ही जब कोरोना से यूरोप तबाह हो रहा था , डाक्टरों को लगातार कई महीनों से थोड़ा भी अवकाश नहीं मिल रहा था , 

तब पुर्तगाल की एक डॉक्टरनी ने खीजकर कहा था -

"रोनाल्डो के पास जाओ न , 

जिसे तुम करोड़ों डॉलर देते हो।

मैं तो कुछ हजार डॉलर ही पाती हूँ।"

मेरा दृढ़ विचार है कि जिस देश में युवा छात्रों के आदर्श वैज्ञानिक , शोधार्थी , शिक्षाशास्त्री आदि न होकर अभिनेता, राजनेता और खिलाड़ी होंगे , उनकी स्वयं की आर्थिक उन्नति भले ही हो जाए , 

देश की उन्नत्ति कभी नहीं होगी। सामाजिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक, रणनीतिक रूप से देश पिछड़ा ही रहेगा हमेशा। ऐसे देश की एकता और अखंडता हमेशा खतरे में रहेगी।

जिस देश में अनावश्यक और अप्रासंगिक क्षेत्र का वर्चस्व बढ़ता रहेगा, वह देश दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जाएगा। 

देश में भ्रष्टाचारी व देशद्रोहियों की संख्या बढ़ती रहेगी, ईमानदार लोग हाशिये पर चले जाएँगे व राष्ट्रवादी लोग कठिन जीवन जीने को विवश होंगे।

 सभी क्षेत्रों में कुछ अच्छे व्यक्ति भी होते हैं। 

उनका व्यक्तित्व मेरे लिए हमेशा सम्माननीय रहेगा ।

आवश्यकता है हम प्रतिभाशाली,ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, समाजसेवी, जुझारू, देशभक्त, राष्ट्रवादी, वीर लोगों को अपना आदर्श बनाएं।

नाचने-गानेवाले, ड्रगिस्ट, लम्पट, गुंडे-मवाली, भाई-भतीजा-जातिवाद और दुष्ट देशद्रोहियों को जलील करने और सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रूप से बॉयकॉट करने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी हमें।

यदि हम ऐसा कर सकें तो ठीक, अन्यथा देश की अधोगति भी तय है।🙏 

आप स्वयं तय करो सलमान खान, आमिर खान, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जितेंद्र,हेमा,रेखा, जया देश के विकास में इनका योगदान क्या है हमारे बच्चे मूर्खों की तरह इनको आइडियल बनाए हुए है।

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

एक सोच बदलाव की . . . . .

काली कमाई के रास्ते खत्म कर दिए जाएँ, नोट बंदी की जरूरत ही क्यों होगी ?


मैं एक डॉक्टर हूं, और इस लिए


" सभी ईमानदार डॉक्टर्स से क्षमा सहित प्रार्थना ...! "


• ........हार्ट अटैक " हो गया ...

डॉक्टर कहता है -  Streptokinase इंजेक्शन ले के आओ ... 9,000/= रु का ... इंजेक्शन की असली कीमत 700/= - 900/= रु के बीच है .., पर उसपे MRP 9,000/= का है ! आप क्या करेंगे?


•..............टाइफाइड हो गया ...

डॉक्टर ने लिख दिया - कुल 14 Monocef लगेंगे ! होल - सेल दाम 25/= रु है ... अस्पताल का केमिस्ट आपको 53/= रु में देता है ... आप क्या करेंगे ??

•............,,,किडनी फेल हो गयी है .., हर तीसरे दिन Dialysis होता है .., Dialysis के बाद एक इंजेक्शन लगता है - MRP शायद 1800 रु है ! 

इंजेक्शन की असली कीमत 500/= है , पर डॉक्टर अपने अस्पताल में MRP पे यानि 1,800/= में देता है ... आप क्या करेंगे ??

..........इन्फेक्शन हो गया है .., 

डॉक्टर ने जो Antibiotic लिखी , वो 540/= रु का एक पत्ता है .., वही Salt किसी दूसरी कम्पनी का 150/= का है और जेनेरिक 45/= रु का ... पर केमिस्ट आपको मना कर देता है .., नहीं जेनेरिक हम रखते ही नहीं , दूसरी कम्पनी की देंगे नहीं .., वही देंगे , जो डॉक्टर साहब ने लिखी है ... यानी 540/= वाली ? आप क्या करेंगे ??

• बाज़ार में Ultrasound Test 750/= रु में होता है .., चैरिटेबल डिस्पेंसरी 240/= रु में करती है ! 750/= में डॉक्टर का कमीशन 300/= रु है !

MRI में डॉक्टर का कमीशन Rs. 2,000/= से 3,000/= के बीच है !

डॉक्टर और अस्पतालों की ये लूट , ये नंगा नाच , बेधड़क , बेखौफ्फ़ देश में चल रहा है !

Pharmaceutical कम्पनियों की Lobby इतनी मज़बूत है, की उसने देश को सीधे - सीधे बंधक बना रखा है !

डॉक्टर्स और दवा कम्पनियां मिली हुई हैं! दोनों मिल के सरकार को ब्लैकमेल करते हैं ...!!

सबसे बडा यक्ष प्रश्न ...

मीडिया दिन रात क्या दिखाता है?


गड्ढे में गिरा प्रिंस .., बिना ड्राईवर की कार, राखी सावंत, Bigboss, सास बहू और साज़िश, सावधान, क्राइम रिपोर्ट, Cricketer की Girl Friend, ये सब दिखाता है, किंतु ... Doctor's, Hospital's और Pharmaceutical company कम्पनियों की, ये खुली लूट क्यों नहीं दिखाता?

मीडिया नहीं दिखाएगा, तो कौन दिखाएगा?

मेडिकल Lobby की दादागिरी कैसे रुकेगी?

इस Lobby ने सरकार को लाचार कर रखा है?

Media क्यों चुप है?

20/= रु मांगने पर ऑटोरिक्सा वाले को, तो आप कालर पकड़ के मारेंगे, ..!

डॉक्टर साहब का क्या करेंगे???

यदि आपको ये सत्य लगता है, तो कर दो फ़ॉरवर्ड, सब को! जागरूकता लाइए और दूसरों को भी जागरूक बनाने में अपना सहयोग दीजिये !!!

The Makers of Ideal Society 

एक सोच बदलाव की . . . . .

गुरुवार, 30 मई 2019

👉 यह हमेशा ध्यान रखे

1) निम्बू-मिर्च खाने के लिये है.. कही टाँगने के लिए नहीं है।

2) बिल्लियाँ जंगली या पालतू जानवर है, बिल्ली के रास्ता काटने से कुछ गलत नहीं होता.. बल्कि चूहों से होनेवाले नुक्सान को बचाया जा सकता है।

3) छींकना एक नैसर्गिक क्रिया है, छींकने से कुछ अनहोनी नहीं होती ना हि किसी काम में बाधा आती है। छींकने से शरीर की सोई हुई मांसपेशियां सक्रिय  हो जाती है।

4) भूत पेड़ों पर नहीं रहते, पेड़ों पर पक्षी रहते है।

5) चमत्कार जैसी कोई चीज नहीं होती। हर घटना के पीछे वैज्ञानिक कारण होता है।

6) तांत्रिक, बाबा, कर्मकांडी जैसे लोग झुठे होते है, जिन्हें शारारिक मेहनत नहीं करनी ; ये वही लोग है। 

7) जादू टोना, या किसी ने कराया ऐसा कुछ नहीं होता, ये दुर्बल लोगों के मानसिक विकार है। 
जादू-टोना करके आपके ग्रहो की दिशा बदलने वाले बाबा, हवा और मेघों की दिशा बदलकर बारिश नहीं ला सकते क्या? सीमाओं पर हमारे जवानों को शहीद होने से बचा नहीं सकते है क्या ?

8 ) वास्तुशास्त्र भ्रामक है। सिर्फ दिशाओ का डर दिखाकर लूटने का तरीक़ा है।
वास्तविक तो पृथ्वी ही खुद हर क्षण अपनी दिशा बदलती है। अगर कुबेर जी उत्तर दिशा में है तो एक ही स्थान या दिशा में अमीर और गरीब दोनों क्यों पाये जाते है?

9) मन्नत के लिये बलि, टिप या चढ़ावे से भगवान प्रसन्न होकर फल देते है, तो क्या भगवान् रिश्वतखोर है?
आध्यात्म मोक्ष के लिए है, धन कमाने के लिए नहीं। 

नोट -- यह मेसैज 15 दूसरे ग्रूप्स में भेजने से कोई खुशखबरी नहीं मिलेगी और इसको डिलीट करने पर कोई अनहोनी भी नहीं होगी। 
परंतु इसे Farword करने से आपके कई मित्र मेहनत और कर्म का महत्त्व जरूर जान सकेंगे। 

कर्मयोगी बनो, मन का डर भगाओ।

रविवार, 25 नवंबर 2018

10 तथ्य


भारत के बारे में
10 ऐसे तथ्य जो मजाकिया होने के साथ सच भी हैं...

1.
भारत एक ऐसा देश है
जो कई स्थानीय भाषाओं द्वारा विभाजित है
और
एक विदेशी भाषा द्वारा  एकजुट है.

2.
भारत में लोग
ट्रैफिक सिग्नल की रेड लाइट पर भले ही ना रुकें,
लेकिन अगर
एक काली बिल्ली रास्ता काट जाए तो हजारों लोग लाइन में खड़े हो जाते हैं.
अब तो लगता है
ट्रैफिक पुलिस में भी काली बिल्लियों की भर्ती करनी पड़ेगी.

3.
भारत का मतदाता
वोट देने से पहले उम्मीदवार की जाति देखता है,
न कि उसकी योग्यता.
अब इन लोगों को कौन समझाये कि भाई तुम देश के लिए नेता ढूंढ रहे हो,
न कि अपने लिए जीजा.

4.
भारत एक ऐसा देश है,
जहाँ एक्टर्स क्रिकेट खेल रहे हैं,
क्रिकेटर्स राजनीति खेल रहे है,
राजनेता पोर्न देख रहे हैं,
और पोर्न स्टार्स एक्टर बन रहे हैं.

5.
भारत में आप
जुगाड़ से करीब-करीब सब कुछ पा सकते हैं.

6.
हम
एक ऐसे देश में रहते हैं,
जहाँ
नोबेल शान्ति पुरस्कार मिलने से पहले लगभग कोई भारतीय नहीं जानता था कि कैलाश सत्यार्थी कौन है.
लेकिन अगर एक
रशियन टेनिस खिलाड़ी
हमारे देश के एक क्रिकेटर को नहीं जानती
तो ये हमारे लिए अपमान की बात है.

7.
भारत
गरीब लोगों का
एक अमीर देश है,
भारत की जनता ने दो फिल्मों,
बाहुबली और बजरंगी भाईजान,
पर 700 करोड़ खर्च कर दिए.

8.
हम भारतीय
अपनी बेटी की पढ़ाई से ज्यादा खर्च बेटी की शादी पे कर देते हैं.

9.
हम एक ऐसे देश में
रहते है, जहाँ एक पुलिसवाले को देखकर लोग सुरक्षित महसूस करने के बजाए घबरा जाते हैं.

10.
हम भारतीय
हेलमेट सुरक्षा के लिहाज से कम,
चालान के डर से ज्यादा पहनते है

मंगलवार, 3 जुलाई 2018

👉 समाज में रेप की घटनाये

मैने 30 जून को अंग प्रदर्शन  और छोटे कपड़े पहनने को लेकर एक पोस्ट की थी आप सभी ने उस को बहुत सरहाया था और 1 या 2 भाई और 1 या 2 दीदी ने कहा की जो छोटी बच्चियो का रेप होता है क्या वो अंग प्रदर्शन करती है। मैंने तब भी कहा था की जो समाज में अंग प्रदर्शन हो रहा है उस की देख कर समाज में रेप की घटनाये बढ़ रही है आज उस का एक सबूत देता हूँ।

आज कानपुर में एक घटना हुई है:------

कानपुरः मोबाइल पर पॉर्न देख 4 बच्चों ने किया 4 साल की बच्ची का रेप

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक अजीब मामला सामने आया है। यहां चार साल की बच्ची के साथ रेप की घटना सामने आई है। हैरानी वाली बात यह है कि रेप का आरोप 6 से 10 साल की उम्र वाले चार बच्चों पर लगा है और बच्चों ने यह अश्लील हरकतें कथित रूप से पॉर्न विडियो से सीखीं। फिलहाल, पुलिस ने सभी चार बच्चों के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। 

चार साल की बच्ची के साथ बच्चों के रेप किए जाने का यह मामला जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र का है। थाना प्रभारी राकेश मौर्य ने बताया कि घटना 30 जून शनिवार की है। बच्ची के पिता की ओर से इस मामले में 2 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज कराई गई। 

बदहवास हालत में खेत में मिली 
बच्ची के पिता ने दी गई तहरीर में कहा है कि उनकी बच्ची बदहवास हालत में खेत में मिली थी। जब होश में आई और आपबीती बयां की तो लोग दंग रह गए। बच्ची ने कहा कि उसके साथ गंदी हरकत की गई।

मौर्य ने बताया कि एक आरोपी 12 वर्ष का है जबकि अन्य तीन की उम्र छह से 10 साल के बीच है। बताया गया कि बच्ची बदहवास हालत में खेत में पाई गई और जब होश में आई और आपबीती बयां की तो लोग दंग रह गए। सभी आरोपियों को को बाल न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सभी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को कबूल लिया है। 

आरोपियों को बाल सुधार गृह भेजा 
पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों को बाल न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सभी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को कबूल लिया है। 

बच्ची ने घटना के बारे में जब परिवार वालों को बताया तो पड़ोसियों ने एफआईआर दर्ज नहीं कराने की सलाह दी थी लेकिन पिता ने हिम्मत दिखाई और पुलिस को सूचना दी। मौर्य ने बताया कि प्रकरण में आगे जांच की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह भी कहा जा रहा है कि इन बच्चों ने रेप से पहले पॉर्न फिल्में देखीं और मासूम बच्ची के साथ वही चीजें दोहराने की कोशिश कीं। 

पुलिस ने बताया कि जांच में पता चला कि बच्चे मोबाइल में पॉर्न विडियो देखते थे। उसी से उन्हें सेक्स के बारे में जानकारी हुई। मोबाइल पर देखने के बाद उन्होंने वैसी ही हरकत बच्ची के साथ की। 

शनिवार, 30 जून 2018

👉 अश्लीलता किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं

मुझे ज्ञान देने वालो के लिए आज एक मोका फिर से

लड़कियो के नग्न घूमने पर जो लोग या स्त्रियां ये कहते कि कपडे नहीं सोच बदलो....
उन लोगो से मेरे कुछ प्रश्न है???

1) हम सोच क्यों बदले?? सोच बदलने की नौबत आखिर आ ही क्यों रही है??? आपने लोगो की सोच का ठेका लिया है क्या??

2) आप उन लड़कियो की सोच का आकलन क्यों नहीं करते?? उसने क्या सोचकर ऐसे कपडे पहने की उसके स्तन पीठ जांघे इत्यादि सब दिखाई दे रहा है....इन कपड़ो के पीछे उसकी सोच क्या थी?? एक निर्लज्ज लड़की चाहती है की पूरा पुरुष समाज उसे देखे,वही एक सभ्य लड़की बिलकुल पसंद नहीं करेगी की कोई उस देखे

3) अगर सोच बदलना ही है तो क्यों न हर बात को लेकर बदली जाए??? 
आपको कोई अपनी बीच वाली ऊँगली का इशारा करे तो आप उसे गलत मत मानिए…… सोच बदलिये.. वैसे भी ऊँगली में तो कोई बुराई नहीं होती…. 
आपको कोई गाली बके तो उसे गाली मत मानिए… उसे प्रेम सूचक शब्द समझिये…..
हत्या ,डकैती, चोरी, बलात्कार, आतंकवाद इत्यादि सबको लेकर सोच बदली जाये…
सिर्फ नग्नता को लेकर ही क्यों????

4) कुछ लड़किया कहती है कि हम क्या पहनेगे ये हम तय करेंगे....पुरुष नहीं.....
जी बहुत अच्छी बात है.....आप ही तय करे....लेकिन हम पुरुष भी किस लड़की का सम्मान/मदद करेंगे ये भी हम तय करेंगे, स्त्रीया नहीं.... और हम किसी का सम्मान नहीं करेंगे इसका अर्थ ये नहीं कि हम उसका अपमान करेंगे

5) फिर कुछ विवेकहीन लड़किया कहती है कि हमें आज़ादी है अपनी ज़िन्दगी जीने की.....
जी बिल्कुल आज़ादी है, ऐसी आज़ादी सबको मिले, व्यक्ति को चरस गंजा ड्रग्स ब्राउन शुगर लेने की आज़ादी हो,गाय भैंस का मांस खाने की आज़ादी हो, वैश्यालय खोलने की आज़ादी हो, पोर्न फ़िल्म बनाने की आज़ादी हो... हर तरफ से व्यक्ति को आज़ादी हो।

6) फिर कुछ नास्तिक स्त्रीया कुतर्क देती है की जब नग्न काली की पूजा भारत में होती है तो फिर हम औरतो से क्या समस्या है??

पहली बात ये की काली से तुलना ही गलत है।। और उस माँ काली का साक्षात्कार जिसने भी किया उसने उसे लाल साडी में ही देखा....माँ काली तो शराब भी पीती है....तो क्या तुम बेवड़ी लड़कियो की हम पूजा करे?? काली तो दुखो का नाश करती है....तुम लड़किया तो समाज में समस्या जन्म देती हो...... और काली से ही तुलना क्यों??? सीता माता या पार्वती माता से क्यों नहीं?? क्यों न हम पुरुष भी काल भैरव से तुलना करे जो रोज कई लीटर शराब पी जाते है???? शनिदेव से तुलना करे जिन्होंने अपनी सौतेली माँ की टांग तोड़ दी थी।

7) लड़को को संस्कारो का पाठ पढ़ाने वाला कुंठित स्त्री समुदाय क्या इस बात का उत्तर देगा की क्या भारतीय परम्परा में ये बात शोभा देती है की एक लड़की अपने भाई या पिता के आगे अपने निजी अंगो का प्रदर्शन बेशर्मी से करे??? क्या ये लड़किया पुरुषो को भाई/पिता की नज़र से देखती है ??? जब ये खुद पुरुषो को भाई/पिता की नज़र से नहीं देखती तो फिर खुद किस अधिकार से ये कहती है की "हमें माँ/बहन की नज़र से देखो"

कौन सी माँ बहन अपने भाई बेटे के आगे नंगी होती है??? भारत में तो ऐसा कभी नहीं होता था....

सत्य ये है की अश्लीलता को किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं ठहराया जा सकता। ये कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधो की तरफ ले जाने वाली एक नशे की दूकान है। और इसका उत्पादन स्त्री समुदाय करता है।

मष्तिष्क विज्ञान के अनुसार 4 तरह के नशो में एक नशा अश्लीलता (सेक्स) भी है।

चाणक्य ने चाणक्य सूत्र में सेक्स को सबसे बड़ा नशा और बीमारी बताया है।।

अगर ये नग्नता आधुनिकता का प्रतीक है तो फिर पूरा नग्न होकर स्त्रीया अत्याधुनिकता का परिचय क्यों नहीं देती?

गली गली और हर मोहल्ले में जिस तरह शराब की दुकान खोल देने पर बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है उसी तरह अश्लीलता समाज में यौन अपराधो को जन्म देती है।।

रविवार, 27 मई 2018

प्रश्न - विनाश काले विपरीत पूजा क्या है?

उत्तर - हिन्दुओं द्वारा परमात्मा को भूलकर पीर, फकीर, साई की पूजा की जा रही है, पिशाच संस्कृति के राक्षसों को हिंदू मंदिरों व घरों में स्थापित किया जा रहा है, पूजा जा रहा है, फिर भी पूछते हो कि विनाश काले विपरीत पूजा क्या है?

कब्र या मजार मरे हुए आदमी की होती है | हिंदू समाज में अगर कोई व्यक्ति मरने वाले के पीछे चार कदम भी रखता है तो उसे घर आकर स्नान करना पडता है| फिर हम मजार पर चढ़ा हुआ प्रसाद बच्चों को क्यों खिलाते है? क्या वह अपवित्र नहीं है? 

सभी कब्र उन मुसलमानों की हैं जो हमारे पूर्वजों से लड़ते हुए मारे गए थे, इस हालत में उनकी कब्रों पर जाकर मन्नत मांगना क्या हमारे उन वीर पूर्वजों का अपमान नहीं हैं जिन्होंने अपने धर्म की रक्षा करते हुए खुशी- खुशी अपने प्राणों को बलि वेदी पर समर्पित कर दिया था?

बहराइच उत्तर प्रदेश में गाजी मियाँ की मजार है जिसको पूजने के लिए देश के कोने कोने से हिंदू आते है|

इतिहास का थोडा सा भी जानकार व्यक्ति जानता है कि महमूद गजनवी के उत्तर भारत को बुरी तरह से लूटने बर्बाद करने के बाद सन् 1030 में उसके भांजे सालार गाजी ने भारत को दारूल इस्लाम बनाने के उद्देश्य से भारत पर आक्रमण किया| सिन्ध, पंजाब, हरियाणा को रौंदता हुआ उत्तर प्रदेश के बहराइच तक जा पहुँचा| 

रास्ते में लाखों हिंदुओं का कत्लेआम किया, लाखो हिंदुओं को इस्लाम में धर्मांतरित किया और लाखों हिंदू ओरतों के बलात्कार हुए, हजारों मंदिरों- गुरुकुलों का विध्वंस कर दिया गया तथा इस्लाम के जिहाद की आंधी तेज चलने लगी|

ऐसे संकट के समय में बहराइच के राजा सुहेल देव पासी ने गाजी मियाँ की सेना का सामना किया जिसमें सालार गाजी मारा गया| 
सलाह गाजी के सेनापति ने वही उसकी कब्र बनवा दी| आज हिंदू उसे अपने कुल देवता मानकर पूजते है| अगर गाजी जिंदा रहता तो वह हिंदुओं का ओर कत्लेआम करता|

क्या हिन्दुओं के ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम, कृष्ण, दुर्गा अथवा तैंतीस कोटि देवी- देवता शक्तिहीन हो चुकें हैं, क्या उनमें एक भी ऐसा देवता नहीं जिसे हमारे मूर्त हिन्दू अपना देवता मान सकें| हिन्दुओं के लिए शव (कब्र) पूजा का अर्थ है प्रेत योनि की दुर्गति| किसी भी शव की पूजा उसे पूजने वाले की कभी सदगति नहीं हो सकती| 

हिंदू समाज को इन मजार, कब्रों, पीरों की पूजा बंद करनी चाहिए|

उस परमपिता परमेश्वर की पूजा करनी चाहिए जो सभी के दिलों में बसता है|

धन्यवाद 👏

गुरुवार, 8 मार्च 2018

👉 नीलामे दो दीनार

नीलामे दो दीनार. कडवा है पर सत्य है । 
******************

...नीलामे दो दीनार..... "जबरदस्ती का भाईचारा ढोते हिंदुओं अपना इतिहास तो देखो................. ...
समयकाल.. ईसा के बाद की ग्यारहवीं सदी..

भारत अपनी पश्चिमोत्तर सीमा पर अभी-अभी ही राजा जयपाल की पराजय हुई थी ...

इस पराजय के तुरंत पश्चात का अफगानिस्तान के एक शहर..... गजनी का एक बाज़ार..!

ऊंचे से एक चबूतरे पर खड़ी कम उम्र की सैंकड़ों हिन्दु स्त्रियों की भीड .. जिनके सामने हज़ारों वहशी से दीखते बदसूरत किस्म के लोगों की भीड़ लगी हुई थी.. जिनमें अधिकतर अधेड़ या उम्र के उससे अगले दौर में थे.. !

कम उम्र की उन स्त्रियों की स्थिति देखने से ही अत्यंत दयनीय प्रतीत हो रही थी.. उनमें अधिकाँश के गालों पर आंसुओं की सूखी लकीरें खिंची हुई थी.. मानो आसुओं को स्याही बना कर हाल ही में उनके द्वारा झेले गए भीषण दौर की कथा प्रारब्ध ने उनके कोमल गालों पर लिखने का प्रयास किया हो.. !

एक बात जो उन सबमें समान थी... किसी के भी शरीर पर वस्त्र का एक छोटा सा टुकड़ा नाम को भी नहीं था.. सभी सम्पूर्ण निर्वसना ..... !

सभी के पैरों में छाले थे.. मानो सैंकड़ों मील की दूरी पैदल तय की हो.. ! सामने खड़े वहशियों की भीड़ अपनी वासनामयी आँखों से उनके अंगों की नाप-जोख कर रही थी.. ! कुछ मनबढ़ आंखों के स्थान पर हाथों का प्रयोग भी कर रहे थे.. !

सूनी आँखों से अजनबी शहर और अनजान लोगों की भीड़ को निहारती उन स्त्रियों के समक्ष हाथ में चाबुक लिए क्रूर चेहरे वाला घिनौने व्यक्तित्व का एक गंजा व्यक्ति खड़ा था.. मूंछ सफाचट.. बेतरतीब दाढ़ी उसकी प्रकृतिजन्य कुटिलता को चार चाँद लगा रही थी.. !
दो दीनार..... दो दीनार... दो दीनार...

हिन्दुओं की खूबसूरत औरतें.. शाही लडकियां.. कीमत सिर्फ दो दीनार.. 
ले जाओ.. ले जाओ.. बांदी बनाओ... एक लौंडी... सिर्फ दो दीनार..
दुख्तरे हिन्दोस्तां.. दो दीनार.. !
भारत की बेटी.. मोल सिर्फ दो दीनार.. !

उस स्थान पर मुसलमानों ने एक मीनार बना रखी है.. जिस पर लिखा है- 'दुख्तरे हिन्दोस्तान.. नीलामे दो दीनार..' अर्थात ये वो स्थान है... जहां हिन्दु औरतें दो-दो दीनार में नीलाम हुईं !

महमूद गजनवी हिन्दुओं के मुंह पर अफगानी जूता मारने.. उनको अपमानित करने के लिये अपने सत्रह हमलों में लगभग चार लाख हिन्दु स्त्रियों को पकड़ कर गजनी उठा ले गया.. घोड़ों के पीछे.. रस्सी से बांध कर..! महमूद गजनवी जब इन औरतों को गजनी ले जा रहा था.. तो वे अपने पिता.. भाई और पतियों से बुला-बुला कर बिलख-बिलख कर रो रही थीं.. अपनी रक्षा के लिए पुकार कर रही थी..! लेकिन करोडो हिन्दुओं के बीच से.. उनकी आँखों के सामने..वो निरीह स्त्रियाँ मुठ्ठी भर मुसलमान सैनिकों द्वारा घसीट कर भेड़ बकरियों की तरह ले जाई गई ! रोती बिलखती इन लाखों हिन्दु नारियों को बचाने न उनके पिता बढे.. न पति उठे.. न भाई और न ही इस विशाल भारत के करोड़ो समान्य हिन्दु ...

महमूद गजनी ने इन हिन्दु लड़कियों और औरतों को ले जा कर गजनवी के बाजार में समान की तरह बेच ड़ाला ! विश्व के किसी धर्म के साथ ऐसा अपमान नही हुआ जैसा हिन्दुओं के साथ ! और ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि इन्होंने तलवार छोड़ दी.. ! सोचते हैं कि जब अत्याचार बढ़ेगा तब भगवान स्वयं उन्हें बचाने आयेंगे.. !
क्यों... ????????????

हिन्दुओं को समझ लेना चाहिये कि भगवान भी अव्यवहारिक अहिंसा व अतिसहिष्णुता को नपुसंकता करार देते हैं !
ये तो अब भी नहीं बदले हैं....
तुम्हारी तैयारी क्या है.. ?

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

असंयमित फैशन

यदि हमारे युवक - युवतियाँ अभिनेताओं तथा अभिनेत्रियों के पहनावा, श्रृंगार, मेकअप, फैशन, पैन्ट, बुश्शर्ट, साड़ियों का अंधानुकरण करते रहे तो असंयमित वासना के द्वार खुले रहेंगे। गंदी फिल्में निरन्तर हमारे युवकों को मानसिक व्यभिचार की ओर खींच रही हैं। उनका मन निरन्तर अभिनेत्रियों के रूप, सौन्दर्य, फैशन और नाज - नजरों में भँवर की तरह अटका रहता है। लाखों - करोड़ों न जाने कितने तरुण - तरुणियों पर इसका जहरीला असर हुआ है फिर भी हम इसे मनोरंजन मानते हैं।

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

हम मुसलमान नही हिन्दू हैं

हम मुसलमान नही हिन्दू हैं हमने विदेशी आक्रमणकारियों की वजह से मजहब बदला है – पाकिस्तानी एक्टिविस्ट

पाकिस्तान की ह्यूमन राईट एक्टिविस्ट फौजिया सईद खुलेआम कहती हैं कि हम पहले हिन्दू थे और हमने विदेशी आक्रमणकारियों की वजह से अपना मजहब बदल लिया है । परन्तु भारत में जब आरएसएस के प्रमुख मोहन  भागवत जब ये कहते हैं कि “भारत में रहने वाले सभी हिन्दू हैं चाहे वो किसी भी पूजा पद्धति को मानते हो “ तो हमारे देश में ही लोगों को एतराज़ हो जाता है । वोट बैंक की राजनीती के लिए इस देश और भू खंड की संस्कृति को भूलकर मुल्लों के तलवे चाटने वाली पार्टियों को फौजिया सईद जी का ये विडियो जरुर देखना चाहिए ।

बता दें कि फौजिया सईद का जन्म लाहौर में 3 जून 1951 को हुआ था – उन्होंने बहुत सारी किताबें भी लिखी हैं – वे पाकिस्तान हेरिटेज संस्था लोकविर्सा की डायरेक्टर भी हैं  , उनको पाकिस्तान में खुली मानसिकता और सच का साथ देने वाली महिला के तौर पर जाना जाता है , फ़ौज़िया को लगता है अगर पाकिस्तान कश्मीर का राग अलापना छोड़ दे तो भारत की मदद से वो एक समृद्ध देश बन सकता है लेकिन पाकिस्तान चीन के हाथों में खेल रहा है और मजहबी कट्टरपंथी मानसिकता से ग्रस्त है ।

देखें ये विडियो और जाने पाकिस्तान की इस स्कॉलर का सच का क़बूलनामा, जिसको देखकर बड़े बड़े कट्टरपंथियों की बोलती हो जाएगी बंद।




शनिवार, 23 सितंबर 2017

👉 धर्म के लिए मरना बेहतर समझा

🌹 अगर गुरु तेगबहादुर जी नहीं होते तो शायद इस देश में अभी हिन्दू नाम मात्र के लिए भी नहीं बचते थे और हम सभी भी यही कोशिश कर रहे होते कि पुरे संसार का इस्लामीकरण केसे किया जाए?
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🔴 औरंगजेब के शासन काल की बात है. औरंगजेब के दरबार में एक विद्वान पंडित आकर रोज़ गीता के श्लोक पढ़ता और उसका अर्थ सुनाता था, पर वह पंडित गीता में से कुछ श्लोक छोड़ दिया करता था.

🔵 एक दिन पंडित बीमार हो गया और औरंगजेब को गीता सुनाने के लिए उसने अपने बेटे को भेज दिया परन्तु उसे बताना भूल गया कि उसे किन-किन श्लोकों का अर्थ राजा को नहीं बताना. पंडित के बेटे ने जाकर औरंगजेब को पूरी गीता का अर्थ सुना दिया. गीता का पूरा अर्थ सुनकर औरंगजेब को यह ज्ञान हो गया कि प्रत्येक धर्म अपने आपमें महान है किन्तु औरंगजेब की हठधर्मिता थी कि उसे अपने धर्म के धर्म के अतिरिक्त किसी दूसरे धर्म की प्रशंसा सहन नहीं थी.

🔴 औरंगजेब ने सबको इस्लाम धर्म अपनाने का आदेश दे दिया और संबंधित अधिकारी को यह कार्य सौंप दिया. औरंगजेब ने कहा, “‘सबसे कह दो या तो इस्लाम धर्म कबूल करें या मौत को गले लगा लें.” इस प्रकार की ज़बरदस्ती शुरू हो जाने से अन्य धर्म के लोगों का जीवन कठिन हो गया.

🔵 जुल्म से ग्रस्त कश्मीर के पंडित गुरु तेगबहादुर के पास आए और उन्हें बताया कि किस प्रकार ‍इस्लाम को स्वीकार करने के लिए अत्याचार किया जा रहा है, यातनाएं दी जा रही हैं. और उनसे अपने धर्म को बचाने की गुहार लगाई.

🔴 तत्पश्चात गुरु तेगबहादुर जी ने पंडितों से कहा कि आप जाकर औरंगजेब से कह ‍दें कि यदि गुरु तेगबहादुर ने इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया तो उनके बाद हम भी इस्लाम धर्म ग्रहण कर लेंगे और यदि आप गुरु तेगबहादुर जी से इस्लाम धारण नहीं करवा पाए तो हम भी इस्लाम धर्म धारण नहीं करेंगे’. औरंगजेब ने यह स्वीकार कर लिया.

🔵 गुरु तेगबहादुर दिल्ली में औरंगजेब के दरबार में स्वयं गए. औरंगजेब ने उन्हें बहुत से लालच दिए, पर गुरु तेगबहादुर जी नहीं माने तो उन पर ज़ुल्म किए गये, उन्हें कैद कर लिया गया, दो शिष्यों को मारकर गुरु तेगबहादुर जी को ड़राने की कोशिश की गयी, पर वे नहीं माने. उन्होंने औरंगजेब से कहा- ‘यदि तुम ज़बरदस्ती लोगों से इस्लाम धर्म ग्रहण करवाओगे तो तुम सच्चे मुसलमान नहीं हो क्योंकि इस्लाम धर्म यह शिक्षा नहीं देता कि किसी पर जुल्म करके मुस्लिम बनाया जाए.’

🌹 गुरुद्वारा शीश गंज साहिब

🔴 औरंगजेब यह सुनकर आगबबूला हो गया. उसने दिल्ली के चांदनी चौक पर गुरु तेगबहादुर जी का शीश काटने का हुक्म ज़ारी कर दिया और गुरुतेग बहादुर जी ने हंसते-हंसते बलिदान दे दिया. गुरुतेग बहादुर जी की याद में उनके ‘शहीदी स्थल’ पर गुरुद्वारा बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा ‘शीश गंज साहिब’ है.

🔵 शर्म कि बात तो ये हे कि आज ओरंगजेब के नाम से अनेको सड़के हे और आज भी चल रही हे

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

16 साल से जिस घोटले पर थी कांग्रेस सरकार चुप

आपको ये जानकार हैरानी होगी कि भारतीय सेना द्वारा गुलाम कश्मीर की जमीन का किराया दिया जाता रहा है. लेकिन ये बात पूरी तरह से सही है. सीबीआई के अनुसार भारतीय सेना पिछले 16 सालों से गुलाम कश्मीर स्तिथ चार प्लाटों का किराया दे रही थी. सीबीआई ने अब इसकी जांच शुरू कर दी है.

सीबीआइ ने अब इस मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है. सीबीआई की एफआइआर के अनुसार खसरा नंबर- 3,000, 3,035, 3,041, 3,045 की 122 कनाल और 18 मारला जमीन का इस्तेमाल भारतीय सेना कर रही है. और सच्चाई यह है कि इस खसरा नंबर की जमीन गुलाम कश्मीर में चली गई है. लेकिन पिछले 16 वर्षों से इस जमीन के किराये की रकम सरकारी खजाने से निकाली जा रही थी.

ये बात सामने आयी है कि डिफेंस एस्टेट विभाग के कुछ अधिकारियों ने आपराधिक साजिश के तहत इस जमीन को भारत में दिखाकर उसे सेना के उपयोग में दिखा दिया और इसके लिए किराया भी दिया जाने लगा. अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि किराया किसी एक व्यक्ति को दिया जाता था या कई लोगों में बांटा जाता था. सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हो सकता है कि इस घोटाले में सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हों.

सीबीआइ की एफआइआर से यह पता लगा है कि तत्कालीन सब डिविजनल डिफेंस एस्टेट अधिकारी आरएएस चंद्रवंशी, नौशेरा के पटवारी दर्शन कुमार ने राजेश कुमार और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर यह काम किया था. इन लोगों ने जमीन के फर्जी दस्तावेज जमा किए थे. सेना अधिकारी, एस्टेट अधिकारी और अन्य अधिकारियों वाले बोर्ड ने जमीन के लिए 4.99 लाख रुपये जारी किए. इस मामले में सरकारी खजाने को छह लाख रुपये का नुकसान पहुंचा. एफआइआर में यह भी कहा गया है कि सेना ने नागरिकों से यह जमीन अधिग्रहीत की थी. बोर्ड ने जमीन की जांच करने के बाद किराए के लिए मंजूरी प्रदान की थी. लेकिन अधिकारियों के बोर्ड ने एक दूसरे के साठगांठ कर जांच में गलत जानकारी दी थी. सीबीआइ ने बताया कि बोर्ड की बैठक वर्ष 2000 में बुलाई गई जिसमें चंद्रवंशी और दर्शन कुमार को रक्षा बलों में कार्यरत बताया गया और राजेश कुमार को 4.99 लाख रुपये किराए के जारी किए गए.

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

एक ईमानदार को मिटाने

जो लड़ते थे कभी कुत्तो की तरह, उनमे अब संधि हो गई !
एक ईमानदार को मिटाने के लिए, सारी सियासत नंगी हो गई!!

तीन लड्डू

एक बुज़ुर्ग दंपत्ति का बेटा जो दिल्ली के एक बड़े विवि में पढता था कुछ दिन की छुट्टियों में गाँव आया, माँ ने लाड़ले के आने की ख़ुशी में प्यार से लड्डू बनाये थे, सो लाकर सामने रख दिये बोली ले बेटा लड्डू खा तेरे लिए बनाये हैं! बेटा प्लेट की ओर देखा तो उसमें 2 लड्डू थे....हर बात में तर्क करने वाला बेटा 'प्रगतिशीलता' दिखाते हुए बोला माँ तीन लड्डू क्यों दे दिए 2 वापस ले जाओ! माँ बोली बेटा 3 कहाँ हैं? 2 ही तो हैं....देख अच्छे से! बेटा बोला कैसे 2 हैं....पूरे तीन लड्डू हैं मैं साबित कर सकता हूँ....बेचारी माँ ठहरी गँवार बोली कैसे? उसनें कुछ यूँ गिनती शुरू की....1 और 2, इन्हें जोड़ कर हुए ना तीन? माँ बोली नहीं बेटा मुझे तो 2 ही दिख रहे हैं.....बेटा तो बेटा अड़ गया बोला 3 ही हैं....बार बार वही तर्क, साबित करने का वही तरीका 1 और 2 इन्हें जोड़ हो गए ना पूरे 3....

माँ बेचारी कहाँ तक बहस करती, चौंका चूल्हा करना था चुपचाप बेटे की हाँ में हाँ मिलाकर चली गई, जाते जाते 'अजी सुनते हो' की टेर लगा गई....सो वहीं पास में ही बाबू जी बैठे थे, कुछ काम कर रहे थे, पर माँ-बेटे की बात भी सुन रहे थे, उन्होंने सब सुना पर एक माँ और बेटे के बीच बोलना ठीक ना समझा....पर अब माँ जा चुकी थी, वे चुपचाप उठकर आये और बोले हाँ बेटा क्या समझा रहे थे अपनी माँ को? ज़रा हम भी तो सुनें....बेटा बोला रहने दीजिए बाबू जी आप नहीं समझेंगे, बाबू जी बोले....बिलकुल समझेंगे बेटा बताओ तो सही....बेटा फिर शुरू, बोला बाबू जी ये कितने लड्डू हैं? 3 ना....बाबू जी, देखे और बोले 2 हैं बेटा....लड़का फिर वही तरीका अपनाया 1 और 2 = 3....बाबू जी JNU में पढ़ने वाले बेटे का क्रांतिकारी स्वभाव तत्काल भाँप गए और बोले.....हाँ बेटा तुम सही कहते हो, तुम्हारी माँ गँवार है ना, कहाँ समझती ये सब, लड्डू 2 नहीं 3 ही हैं, मैं तुमसे सहमत हूँ....बेटा खुश हो गया, उसे लगा उसनें सच्चा क्रांतिकारी बनने की पहली परीक्षा पास कर ली।

तभी उन्होंने क्रांति कुमार की माँ को आवाज़ दी, माँ भागी चली आई....बाबू जी बोले 1 लड्डू उठाओ, खाओ, माँ ने खा लिया, दूसरा खुद बाबू जी खा गए और बेटे से कहा बेटा वो जो तीसरा वाला है ना, तुम खा लेना....बेटा अब बाप का मुँह देखते रह गया, जब उन्होंने धीरे से बताया कि वो बचपन में शाखा जाया करते थे। 

गुंडागर्दी जायज़ नहीं है. लेकिन............

रानी पद्मावती पर फिल्म बना रहे संजय लीला भंसाली के साथ जो हुआ, कितना उचित, कितना अनुचित ।

कहते हैं सिनेमा समाज का आईना होता है, ठीक वैसे ही जैसे साहित्य समाज का आइना होता है. फिर   ये आइना अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की छूट कैसे दे देता है ? 

"...यहां प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे, 
कूद पड़ी थी यहां हज़ारों पद्मिनियां अंगारों पे.
बोल रही है कण कण से कुर्बानी राजस्थान की..."

फिल्म के लिए रिसर्च करते समय संजय लीला भंसाली ये नहीं पढ़ा या सुना था क्या? भाई पद्मिनी पे पिक्चर बना रहे थे तो मलिक मुहम्मद जायसी का पद्मावत भी पढ़ा ही होगा. 

जब इतिहास के हर दस्तावेज़ में पद्मिनी को जगह ही इस लिए मिली कि वो अलाउद्दीन खिलजी के आने के पहले हज़ारों औरतों के साथ आग में कूद गई, तो कौन से ‘अल्टरनेट व्यू’ से आप खिलजी और पद्मिनी को प्रेम कहानी के खांचे में ढाल रहे हैं? और अगर ‘अल्टरनेट व्यू’ के नाम पे कुछ भी जायज़ है तो फिर विरोध के ‘अल्टरनेट’ तरीके पर इतना हंगामा काहे के लिए है? 

करनी सेना ने संजय लीला भंसाली के साथ सही नहीं किया.

लेकिन करनी सेना जैसे संगठनों को ताकत कहां से आती है? 

उसी बॉलीवुड से आती है, जो संजय लीला भंसाली को थप्पड़ पड़ने पे तो अभिव्यक्ति की आज़ादी चिल्लाने लगता है, लेकिन ए आर रहमान के खिलाफ़ फतवा आने के बाद मुंह ढंक कर सोया रहता है. 

करनी सेना को ताकत उस कोर्ट से आती है जो जल्ली कट्टू को जानवरों पर अत्याचार मान कर बैन कर देता है, लेकिन बकरीद के खिलाफ़ याचिका को सुनने से ही इंकार कर देता है. 

करनी सेना को ताकत उस सिस्टम से मिलती है जो एम एफ़ हुसैन को हिंदू देवी देवताओं की अश्लील तस्वीरें बनाने पर तो सुरक्षा मुहैया कराता है लेकिन चार्ली हेब्दो वाला कार्टून अपने पब्लीकेशन में छापने वाली औरत को दर दर धक्के खाने के लिए मजबूर कर देता है. 

गुंडागर्दी जायज़ नहीं है. लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अपनी ‘इंटेलेक्चुअल गुंडागर्दी’ भी तो बंद कीजिए !

👉 एक बात मेरी समझ में कभी नहीं आई

🏳️ध्यान से पढ़ियेगा👇      〰️〰️〰️〰️〰️ एक बात मेरी समझ में कभी नहीं आई कि  ये फिल्म अभिनेता (या अभिनेत्री) ऐसा क्या करते हैं कि इनको एक फिल्म...